पति को काम के घर से दूर जाने से मिली निजात महतारी वंदन योजना से गांव में ही रोजगार की राह
बीजापुर, 27 अगस्त 2026/sns/- मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय की महिला सशक्तिकरण की सोच ग्रामीण महिलाओं के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रही है। इसका उदाहरण बीजापुर जिले की सुदूर ग्राम पंचायत फरसेगढ़ की हितग्राही श्रीमती सुषमा मरकाम (33 वर्ष), पति श्री भीमा मरकाम की कहानी है, जिन्होंने महतारी वंदन योजना से मिली आर्थिक सहायता का सदुपयोग कर परिवार को आत्मनिर्भरता की राह पर आगे बढ़ाया है।
सुषमा मरकाम के पति भीमा पहले रोजगार की तलाश में गांव से बाहर जाकर मिस्त्री का काम करते थे। पति के लंबे समय तक बाहर रहने से घर और तीन छोटे बच्चों -दो बेटियों और एक बेटे -की देखभाल की जिम्मेदारी सुषमा पर ही रहती थी। परिवार के सामने आर्थिक चुनौतियों के साथ एक-दूसरे से दूर रहने की मजबूरी भी थी।
इसी बीच महतारी वंदन योजना से सुषमा को हर माह मिलने वाली 1000 रुपये की आर्थिक सहायता उनके परिवार के लिए नई उम्मीद बनी। सुषमा और उनके पति ने इस राशि को बचाकर गांव में ही रोजगार शुरू करने का निर्णय लिया। दोनों ने मिलकर किराना एवं साइकिल दुकान शुरू की।
सुषमा बताती हैं, “हमने सोचा कि क्यों न महतारी वंदन की राशि को जोड़कर अपना छोटा-सा व्यवसाय शुरू किया जाए, ताकि मेरे पति को रोजगार के लिए बाहर न जाना पड़े। आज हम दोनों मिलकर दुकान चलाते हैं और हमारा परिवार साथ रह रहा है।”
अब परिवार साथ, बच्चों के सपनों को मिल रही उड़ान
दुकान से होने वाली आय और महतारी वंदन योजना से मिलने वाली सहायता से परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार आया है। भीमा मरकाम को अब रोजगार के लिए गांव से बाहर नहीं जाना पड़ता। दोनों पति-पत्नी मिलकर दुकान संचालित कर रहे हैं और अपने तीनों बच्चों की पढ़ाई-लिखाई पर भी ध्यान दे पा रहे हैं। सुषमा कहती हैं, महतारी वंदन ने मुझे सिर्फ 1000 रुपये नहीं दिए, बल्कि मेरे परिवार को एक साथ रहने का अवसर दिया। मेरे पति अब मेरे साथ हैं और बच्चे भी खुश हैं। इसके लिए मैं मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय जी का हृदय से आभार व्यक्त करती हूं। सुषमा मरकाम की यह कहानी बताती है कि सही दिशा में किया गया छोटा-सा निवेश भी परिवार के जीवन में बड़ा बदलाव ला सकता है। महतारी वंदन योजना से मिली आर्थिक सहायता ने उनके परिवार को न केवल अतिरिक्त आय का साधन दिया, बल्कि रोजगार के लिए होने वाले पलायन को रोकने और परिवार को एकजुट रखने में भी मदद की। बहनों की तरक्की ही परिवार की शान, विष्णु भैया का यही अभिमान।