₹2.70 लाख के ऋण से मनीषा ने खड़ी की राइस मिल, अब आत्मनिर्भरता के साथ ग्रामीणों को भी मिल रही सुविधा

बीजापुर, 08 सितंबर 2026/sns/- कभी रोजगार की तलाश और भविष्य की चिंता से जूझ रही 22 वर्षीय मनीषा नायक ने अवसर और सही मार्गदर्शन मिलने पर अपनी मेहनत से सफलता की नई कहानी लिखी है। जिला बीजापुर की निवासी मनीषा ने प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य प्रसंस्करण उद्यम योजना (PMFME) के तहत ₹2.70 लाख का ऋण प्राप्त कर राइस मिल स्थापित की और आज आत्मनिर्भर बनकर अपने परिवार का सहारा बनी हैं।

मनीषा बताती हैं कि लंबे समय तक रोजगार की तलाश के बावजूद उन्हें स्थायी अवसर नहीं मिल पा रहा था। इसी दौरान परिचित के माध्यम से उन्हें जिला उद्योग केंद्र, बीजापुर की जानकारी मिली। यहां उनकी मुलाकात डीआरपी श्री रमेश कुमार पुरी से हुई। उन्होंने PMFMEयोजना की जानकारी देते हुए स्वयं का व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रेरित किया और आवश्यक मार्गदर्शन प्रदान किया।

प्रेरणा और मार्गदर्शन से उत्साहित होकर मनीषा ने भारतीय स्टेट बैंक, ब्लॉक भैरमगढ़ में PMFMEयोजना के अंतर्गत क्रेडिट लोन के लिए आवेदन किया। प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें ₹2 लाख 70 हजार का ऋण स्वीकृत हुआ। इसी राशि से उन्होंने राइस मिल स्थापित की।

ग्रामीणों की परेशानी हुई दूर

मनीषा की राइस मिल शुरू होने से क्षेत्र के ग्रामीणों को भी बड़ी सुविधा मिली है। पहले स्थानीय लोगों को धान से चावल निकलवाने के लिए 5 से 8 किलोमीटर दूर जाना पड़ता था। इससे समय और परिवहन खर्च दोनों बढ़ते थे। अब गांव के नजदीक ही राइस मिल की सुविधा उपलब्ध होने से ग्रामीणों को राहत मिली है। मनीषा धान से चावल निकालने के साथ ब्रान (चोकर) और धान की भूसी भी उपलब्ध कराती हैं। इससे उन्हें अतिरिक्त आय प्राप्त हो रही है। स्थानीय जरूरत को पूरा करने वाला यह छोटा उद्यम अब उनकी नियमित आय का माध्यम बन चुका है।

मेहनत और हौसले से बदली जिंदगी

व्यवसाय की शुरुआत में मशीन संचालन, ग्राहकों से संपर्क और कामकाज को व्यवस्थित करने जैसी चुनौतियां सामने आईं, लेकिन मनीषा ने धैर्य और मेहनत से इनका सामना किया। आज उनकी आर्थिक स्थिति पहले से बेहतर है और वे आत्मनिर्भर होकर अपने परिवार के लिए मजबूत सहारा बन रही हैं।

मनीषा अपनी सफलता का श्रेय जिला उद्योग केंद्र, बीजापुर से मिले मार्गदर्शन और PMFMEयोजना से प्राप्त आर्थिक सहयोग को देती हैं। उनका कहना है कि सही मार्गदर्शन और अवसर मिले तो ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं भी अपना व्यवसाय स्थापित कर आत्मनिर्भर बन सकती हैं। मनीषा का यह सफर इस बात की मिसाल है कि सरकारी योजनाओं का प्रभावी लाभ और दृढ़ इच्छाशक्ति मिलकर रोजगार तलाशने वाले युवाओं को रोजगार देने वाला उद्यमी बना सकती है।

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