हिंसा का रास्ता छोड़ने वालों को नई जिंदगी की राह
बीजापुर, 08 सितम्बर 2026/sns/- छत्तीसगढ़ शासन की नक्सलवादी आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत एवं पुनर्वास नीति 2025 के तहत हिंसा का रास्ता छोड़कर समाज की मुख्यधारा में लौटने वाले आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास को मजबूत करने की दिशा में बीजापुर जिले में महत्वपूर्ण पहल की गई है। कलेक्टर श्री विश्वदीप ने नीति में उल्लेखित प्रावधानों के अनुसार आत्मसमर्पित नक्सलियों को 4 करोड़ 84 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि आहरण एवं संवितरण की स्वीकृति प्रदान की है।
इस पहल का उद्देश्य आत्मसमर्पित नक्सलियों को सुरक्षित एवं सम्मानजनक जीवन की ओर आगे बढ़ने के लिए आर्थिक संबल प्रदान करना तथा उन्हें समाज की मुख्यधारा में स्थायी रूप से जोड़ना है। प्रोत्साहन राशि आत्मसमर्पित नक्सलियों के नाम से राष्ट्रीयकृत बैंकों में तीन वर्ष की सावधि जमा (एफडी) के माध्यम से प्रदान की जाएगी। नीति के प्रावधानों के अनुसार सावधि जमा की राशि के आहरण की प्रक्रिया निर्धारित शर्तों के अधीन होगी। पुलिस अधीक्षक द्वारा आत्मसमर्पित नक्सली के आहरण संबंधी प्रमाणन के उपरांत ही संबंधित आत्मसमर्पित नक्सली को जमा राशि निकालने की अनुमति प्रदान की जाएगी।
पुनर्वास नीति से मिल रहा नई शुरुआत का अवसर
आत्मसमर्पण के बाद पुनर्वास की प्रक्रिया केवल आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका व्यापक उद्देश्य आत्मसमर्पित व्यक्तियों को सामान्य सामाजिक जीवन, रोजगार, स्वरोजगार और सुरक्षित भविष्य की दिशा में आगे बढ़ने का अवसर उपलब्ध कराना है। शासन की पुनर्वास नीति के माध्यम से आत्मसमर्पित नक्सलियों को हिंसा और भय के वातावरण से बाहर निकलकर विकास की मुख्यधारा से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है। बीजापुर जैसे पूर्व नक्सल प्रभावित जिले में इस प्रकार की पहल शांति, पुनर्वास और विकास के प्रयासों को मजबूती प्रदान करती है। 4 करोड़ 84 लाख रुपये की प्रोत्साहन राशि का संवितरण आत्मसमर्पित नक्सलियों के पुनर्वास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, जिससे उन्हें आर्थिक स्थिरता के साथ सम्मानजनक जीवन की नई शुरुआत करने में मदद मिलेगी। कलेक्टर श्री विश्वदीप ने कहा कि शासन की पुनर्वास नीति का मूल उद्देश्य हिंसा का रास्ता छोड़ने वाले लोगों को समाज की मुख्यधारा से जोड़कर उन्हें बेहतर भविष्य का अवसर उपलब्ध कराना है।