दिल में था छेद, हौसले में नहीं: इलाज के बाद रितु ने फिर थामी किताबें, सपनों को मिली नई उड़ान
सुकमा, 15 सितम्बर 2026/sns/s- कभी दिल में छेद की गंभीर बीमारी से जूझ रही कोंटा की छात्रा कुमारी कटटम रितु के लिए जिंदगी जैसे अचानक ठहर गई थी। ग्राम एर्राबोर की रहने वाली रितु के परिवार को जब पता चला कि उसके हृदय में जन्मजात समस्या है, तो सामान्य जीवन और पढ़ाई को लेकर चिंताएं बढ़ गईं। आर्थिक और पारिवारिक परिस्थितियां भी ऐसी थीं कि महंगे उपचार की चिंता परिवार के सामने बड़ी चुनौती बनकर खड़ी थी। लेकिन रितु और उसके परिवार ने हिम्मत नहीं हारी। बीमारी के सामने हार मानने के बजाय उन्होंने इलाज की राह चुनी और रितु ने अपने बेहतर भविष्य की उम्मीद को कायम रखा।
समय पर पहचान और सरकारी स्वास्थ्य योजना बनी रितु के लिए उम्मीद की किरण। कलेक्टर श्री अमित कुमार एवं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. आरके सिंह के मार्गदर्शन में स्वास्थ्य विभाग की चिरायु योजना (राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम) के तहत रितु को निःशुल्क उपचार की सुविधा उपलब्ध कराई गई। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कोंटा में डॉ. सोमेन्द्र कुमार रात्रे एवं डॉ. हिरमा मरकाम द्वारा परीक्षण और आवश्यक परामर्श के बाद उसे बेहतर उपचार के लिए रायपुर स्थित नारायणा एमएमआई अस्पताल भेजा गया। वहां हृदय रोग विशेषज्ञ चिकित्सकों ने आवश्यक जांच कर उपचार की प्रक्रिया आगे बढ़ाई।
रायपुर में सफल उपचार के बाद रितु ने बीमारी को पीछे छोड़कर जिंदगी की नई शुरुआत की है। हृदय में मौजूद छेद का सफलतापूर्वक ऑपरेशन और उपचार होने के बाद अब वह स्वस्थ होकर अपने सामान्य जीवन में लौट रही है। जिस चेहरे पर कभी बीमारी और चिंता की परछाई थी, वहां अब मुस्कान है। उसकी आंखों में फिर से पढ़ाई पूरी करने और अपने सपनों को साकार करने की चमक दिखाई दे रही है। कठिन दौर में भी रितु ने अपनी पढ़ाई के प्रति लगन और आत्मविश्वास को कमजोर नहीं होने दिया।
रितु की कहानी सिर्फ बीमारी से उबरने की कहानी नहीं, बल्कि हौसले, परिवार के सहयोग और समय पर मिले उपचार की जीत की कहानी है। सही समय पर बीमारी की पहचान, उचित चिकित्सा, चिकित्सकों का मार्गदर्शन और परिवार का साथ मिल जाए तो कठिन से कठिन परिस्थितियों को भी सफलता में बदला जा सकता है। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी के सेवा संकल्प की भावना के अनुरूप संवेदनशील स्वास्थ्य पहल ने रितु को नया जीवन और नई उम्मीद दी है। आज स्वस्थ रितु फिर किताबों की ओर कदम बढ़ा रही हैकृमानो उसका हौसला कह रहा हो कि मुश्किलें कितनी भी बड़ी हों, मजबूत इरादों के सामने मंजिल दूर नहीं होती।