रायगढ़ के ललित ने रेशम पालन की आमदनी से किया बेटी का विवाह और बनाया

रायगढ़, 19 सितम्बर 2026/sns/- सेवा संकल्प अभियान के तहत शासकीय योजनाओं और विभागीय मार्गदर्शन से ग्रामीणों की आजीविका को नई दिशा मिल रही है। तमनार विकासखंड के ग्राम आमाघाट निवासी श्री ललित गुप्ता इसकी प्रेरक मिसाल हैं। कभी भूमिहीन होने के कारण मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करने वाले ललित गुप्ता ने रेशम विभाग के मार्गदर्शन में टसर कृमिपालन और टसर बीज निर्माण का कार्य शुरू किया। मेहनत और लगन से उन्होंने रेशम पालन को अपनी आय का मजबूत जरिया बनाया और पिछले तीन वर्षों में करीब 4.50 लाख रुपये की अतिरिक्त आमदनी अर्जित की। इस आय से उन्होंने बेटी का विवाह किया, कच्चे घर को पक्का बनाया और परिवार की जरूरतों के साथ भविष्य को भी सुरक्षित किया। उनकी मेहनत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली और वर्ष 2024-25 में उन्हें सर्वश्रेष्ठ टसर कोसा उत्पादक का सम्मान भी प्राप्त हुआ।
मजदूरी से रेशम पालन तक, मेहनत ने बदली परिवार की आर्थिक स्थिति
तमनार विकासखंड के वनांचल क्षेत्र स्थित ग्राम आमाघाट निवासी श्री ललित गुप्ता के लिए भूमिहीन होने के कारण सालभर परिवार का भरण-पोषण करना चुनौतीपूर्ण था। उनकी आय का मुख्य साधन मजदूरी था। इसी बीच उन्होंने अतिरिक्त आमदनी की तलाश में रेशम विभाग के आमाघाट केंद्र से जुड़कर टसर कृमिपालन एवं टसर बीज निर्माण का कार्य शुरू किया। शुरुआत में आमदनी कम हुई, लेकिन ललित गुप्ता ने हिम्मत नहीं छोड़ी। विभागीय मार्गदर्शन और अपनी मेहनत के बल पर वे लगातार इस कार्य को आगे बढ़ाते रहे। समय के साथ उनके टसर कोसा उत्पादन में वृद्धि होने लगी और इस कार्य से होने वाली आमदनी भी बढ़ती गई। पिछले तीन वर्षों में उन्हें टसर कृमिपालन एवं टसर बीज निर्माण से लगभग 4.50 लाख रुपये की अतिरिक्त आय प्राप्त हुई। वर्ष 2024-25 में उन्होंने करीब 1.05 लाख टसर कोसा का उत्पादन किया, जिसके एवज में उन्हें 1.93 लाख रुपये का भुगतान प्राप्त हुआ। इसके अलावा टसर बीज निर्माण कार्य से उन्हें करीब 30 हजार रुपये की अतिरिक्त आमदनी हुई।
रेशम पालन से संवरता परिवार, मेहनत को मिला राष्ट्रीय सम्मान
रेशम पालन से प्राप्त आमदनी ने ललित गुप्ता के परिवार को आर्थिक मजबूती दी। उन्होंने अपनी पुत्री का विवाह संपन्न कराया और वर्षों से कच्चे मकान को पक्का कराया। इसके साथ ही वे स्वयं और अपनी पत्नी के लिए प्रतिवर्ष करीब 40 हजार रुपये की बीमा किस्त जमा करते हैं। दैनिक उपयोग के लिए उन्होंने एक नई मोटरसाइकिल भी खरीदी है। इस तरह रेशम पालन से हुई आय का उपयोग उन्होंने परिवार की जरूरतों को पूरा करने के साथ भविष्य को सुरक्षित करने में किया। ललित गुप्ता की मेहनत और लगन को वर्ष 2024-25 में राष्ट्रीय स्तर पर भी पहचान मिली। “मेरा रेशम मेरा अभिमान” अभियान के अंतर्गत उन्हें सर्वश्रेष्ठ टसर कोसा उत्पादक का पुरस्कार केंद्रीय रेशम बोर्ड, वस्त्र मंत्रालय, भारत सरकार, बेंगलुरु (कर्नाटक) द्वारा प्रदान किया गया।
ललित गुप्ता कहते हैं कि मन में कुछ करने की ठान ली जाए तो असंभव सा दिखने वाला काम भी संभव हो जाता है। रेशम पालन ने न केवल उनकी आमदनी बढ़ाई, बल्कि परिवार के सपनों को पूरा करने का रास्ता भी खोला। आज वे आत्मविश्वास के साथ टसर कृमिपालन एवं टसर बीज निर्माण का कार्य कर रहे हैं और अन्य ग्रामीणों को भी मेहनत के साथ उपलब्ध अवसरों का लाभ उठाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

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