देशी गायों से शुरू हुआ सफर, आज उन्नत पशुपालन से सालाना 10 लाख से अधिक की आय

सारंगढ़-बिलाईगढ़, 19 सितम्बर 2026/sns/- सेवा संकल्प अभियान के माध्यम से शासकीय योजनाओं का लाभ जब जमीनी स्तर पर पहुंचता है, तो यह केवल सुविधा नहीं, बल्कि लोगों की आजीविका और जीवन में बदलाव का आधार बनता है। ग्राम भड़ीसर के श्री गोपी सिदार की कहानी इसका जीवंत उदाहरण है। कभी 8 से 10 देशी गायों से प्रतिदिन 15 से 20 लीटर दूध उत्पादन करने वाले श्री सिदार आज उन्नत नस्ल की गायों से करीब 80 लीटर दूध प्रतिदिन उत्पादन कर रहे हैं। कृत्रिम गर्भाधान से बढ़ी पशुओं की उत्पादकता, विभागीय सहयोग और पशुधन बीमा से मिली आर्थिक सुरक्षा ने उनके पशुपालन को सीमित आमदनी के साधन से एक स्थायी और लाभकारी व्यवसाय में बदल दिया है।

श्री गोपी सिदार लंबे समय से पशुपालन व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। पहले उनके पास मुख्य रूप से देशी नस्ल की गायें थीं। कम दुग्ध उत्पादन के कारण पशुपालन से होने वाली आमदनी सीमित थी। वहीं पशुओं की आकस्मिक मृत्यु की स्थिति में परिवार के सामने आर्थिक नुकसान का जोखिम भी बना रहता था। ऐसे समय में पशुपालन विभाग द्वारा संचालित योजनाओं और तकनीकी सेवाओं ने उनके लिए नई संभावनाओं के द्वार खोले।

*कृत्रिम गर्भाधान से 15-20 लीटर से बढ़कर 80 लीटर हुआ दूध उत्पादन*

पशुपालन विभाग के कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम का लाभ लेने के बाद श्री सिदार के पशुधन में नस्लीय सुधार हुआ। वर्तमान में उनके पास 4 एच.एफ. क्रॉसब्रीड एवं 1 जर्सी क्रॉसब्रीड उच्च उत्पादक दुग्धारू गाय हैं। इन उन्नत नस्ल के पशुओं से अब करीब 80 लीटर दूध प्रतिदिन प्राप्त हो रहा है। पहले जहां कुल दुग्ध उत्पादन 15 से 20 लीटर प्रतिदिन था, वहीं अब इसमें कई गुना वृद्धि हुई है।

      उत्पादित दूध का विक्रय वे देवभोग, छत्तीसगढ़ राज्य दुग्ध महासंघ के माध्यम से करते हैं। 35 रूपये प्रति लीटर की दर से उन्हें प्रतिदिन लगभग 2 हजार 800 की आय प्राप्त होती है। इस आधार पर उनकी मासिक आय करीब 84 हजार रूपए तथा वार्षिक आय 10 लाख रुपये से अधिक तक पहुंच रही है। नियमित आय से परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत हुई है। बच्चों की शिक्षा, कृषि कार्यों में निवेश और परिवार की अन्य आवश्यकताओं को पूरा करना अब पहले की तुलना में आसान हुआ है।

*दूध के साथ जैविक खाद से भी अतिरिक्त आमदनी*

श्री गोपी सिदार ने पशुपालन से प्राप्त गोबर को भी आय का जरिया बनाया है। वे गोबर से जैविक खाद तैयार करते हैं, जिसे स्थानीय किसान खरीदते हैं। इससे उन्हें अतिरिक्त आमदनी प्राप्त होती है। साथ ही जैविक खाद के उपयोग से कृषि भूमि की उर्वरता बनाए रखने और रासायनिक उर्वरकों पर होने वाले खर्च को कम करने में भी मदद मिलती है।पशुपालन विभाग द्वारा उन्हें समय-समय पर कृत्रिम गर्भाधान, निःशुल्क टीकाकरण, कृमिनाशन, पशु चिकित्सा उपचार, रोग नियंत्रण एवं तकनीकी मार्गदर्शन जैसी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाती हैं। इन सेवाओं से पशुओं का स्वास्थ्य बेहतर बना हुआ है तथा दुग्ध उत्पादन में निरंतरता बनी हुई है।

*पशुधन बीमा ने दिया आर्थिक सुरक्षा का भरोसा*

पशुपालन व्यवसाय को जोखिम से सुरक्षित रखने के लिए श्री गोपी सिदार ने राष्ट्रीय पशुधन मिशन  की पशुधन बीमा योजना का भी लाभ लिया। योजना के अंतर्गत उनके पशुओं का 60रुपये  हजार प्रति पशु तक का बीमा मात्र 585 रुपए प्रति पशु प्रीमियम पर तीन वर्ष की अवधि के लिए कराया गया है। बीमा सुरक्षा मिलने से पशु की आकस्मिक मृत्यु की स्थिति में होने वाले बड़े आर्थिक नुकसान से सुरक्षा का भरोसा मिला है।

श्री गोपी सिदार कहते हैं कि कृत्रिम गर्भाधान कार्यक्रम, पशुधन बीमा योजना और विभागीय सहयोग से उनके पशुपालन व्यवसाय को नई दिशा मिली है। इसके लिए वे प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के प्रति आभार व्यक्त करते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार की योजनाओं का लाभ मिलने से उनका परिवार आर्थिक रूप से मजबूत हुआ है और अब वे पूरे आत्मविश्वास के साथ पशुपालन को आगे बढ़ा रहे हैं। वे अन्य पशुपालकों को भी शासकीय योजनाओं का लाभ लेकर अपनी आय बढ़ाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।

About The Author