बस्तर के खेतों में बही समृद्धि की बयार

जगदलपुर, 10 अगस्त 2026/sns/- क्या कोई सोच सकता था कि खेतों की वही मिट्टी, जो कल तक मुश्किल से जीवन की बुनियादी जरूरतें पूरी कर पा रही थी, आज किसी के सपनों की सबसे बड़ी उड़ान बन जाएगी?

बस्तर संभाग के ग्राम छिंदगांव की फिजाओं में आज उम्मीद और स्वाभिमान की एक नई खुशबू घुली हुई है। यहाँ की निवासी और जागृति महिला समूह से जुड़ी एक साधारण-सी ग्रामीण महिला रैबाली कश्यप ने संघर्ष के अँधेरों को चीरते हुए अपनी किस्मत का पन्ना खुद लिखा है!
      एक समय था जब खेती सिर्फ जीवन-यापन का जरिया थी, लेकिन जब रैबाली ने एकीकृत कृषि क्लस्टर का दामन थामा, तो मानो उनके इरादों को पंख लग गए। उन्होंने पारंपरिक सोच की बेड़ियों को तोड़ा और एक साथ अपनी जमीन पर पाँच बड़ी गतिविधियों की नींव रखी बकरीपालन, गायपालन, मुर्गीपालन, सुगंधित धान और हरी-भरी सब्जियों का उत्पादन!

रैबाली की मेहनत और लगन का ऐसा रंग लाया कि उनके खेत और आँगन खुशहाली का केंद्र बन गए। आज सिर्फ बकरीपालन से उन्हें 60 हजार रुपए और मुर्गीपालन से 30 हजार रुपए की अच्छी आय हो रही है। यही नहीं सब्जियों की उपज से 24 हजार रुपए, गायपालन से 20 हजार रुपए और सुगंधित धान की महक के साथ 20 हजार रुपए की कमाई ने उनकी तकदीर ही बदल दी। सुगंधित धान से मिलने वाली अतिरिक्त राशि के साथ अब वे हर साल डेढ़ लाख रुपए से भी अधिक का बढ़िया मुनाफा अर्जित कर रही हैं!

आज रैबाली दीदी किसी की मोहताज नहीं हैं वे अपने परिवार की सबसे बड़ी ताकत बन चुकी हैं। अपने बच्चों के खिलखिलाते चेहरे, उनकी बेहतर शिक्षा और स्वास्थ्य को देखकर उनका सीना गर्व से चैड़ा हो जाता है। समाज में जब लोग उन्हें सम्मान की नजर से देखते हैं, तो उनका हर एक संघर्ष सफल होता नजर आता है।
रैबाली कश्यप ने यह साबित कर दिया है कि अगर मन में जज्बा हो, तो परिस्थितियाँ चाहे जो भी हों, सफलता की कहानी खुद लिखी जा सकती है। उनकी यह बुलंद आवाज आज गाँव-गाँव गूँज रही है एकीकृत कृषि अपनाएँ-आय बढ़ाएँ, खुशहाल जीवन बनाएँ!

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