बहनों की तरक्की से परिवार की शान, महतारी वंदन से सुजाता ने चूल्हे से लिखी आत्मनिर्भरता की कहानी

बीजापुर, 27 अगस्त 2026/sns/-“महिला सशक्तिकरण की सोच, नारी शक्ति का है सम्मान, महतारी वंदन से बढ़ा देश का मान” -मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय की महिला सशक्तिकरण की सोच को ग्राम मद्देड़ की रहने वाली श्रीमती सुजाता रालाबंडी ने अपनी मेहनत और समझदारी से साकार कर दिखाया है। आंगनबाड़ी केंद्र मद्देड़-3 की 27 वर्षीय हितग्राही सुजाता ने महतारी वंदन योजना से मिली आर्थिक सहायता को बचत में बदलकर अपना छोटा-सा खाद्य व्यवसाय शुरू किया और आज आत्मनिर्भरता की ओर मजबूती से कदम बढ़ा रही हैं।

सुजाता के पति श्री महादेव रालाबंडी गांव से बाहर रहकर मजदूरी करते हैं। सीमित आय में परिवार की जरूरतें पूरी करने के साथ दो छोटे बच्चों, जिनकी उम्र 7 और 4 वर्ष है, की परवरिश करना उनके लिए चुनौतीपूर्ण था। परिस्थितियां कठिन थीं, लेकिन सुजाता ने हार मानने के बजाय अपने भविष्य को बेहतर बनाने का रास्ता चुना।

12 हजार रुपये की बचत बनी आत्मनिर्भरता की पहली पूंजी

सुजाता बताती हैं कि महतारी वंदन योजना उनके जीवन में बदलाव की नई किरण बनकर आई। योजना के तहत मिलने वाली प्रतिमाह 1,000 रुपये की राशि को उन्होंने खर्च करने के बजाय भविष्य के लिए सुरक्षित रखना शुरू किया। मार्च 2024 से मार्च 2025 तक प्राप्त 12 किस्तों की कुल 12 हजार रुपये की राशि को उन्होंने धीरे-धीरे जोड़कर व्यवसाय के लिए पूंजी तैयार की। इसी राशि से उन्होंने बर्तन, कड़ाही और बड़ा गैस चूल्हा खरीदा। इसके बाद अगले पांच माह की किस्तों से बेसन, तेल सहित अन्य आवश्यक राशन सामग्री खरीदी। फिर सड़क किनारे छोटी-सी झोपड़ी तैयार कर उन्होंने अपना व्यवसाय शुरू किया।

भजिया, अइरसा और सकनाल से बढ़ी आमदनी

आज सुजाता अपनी छोटी-सी दुकान में बस्तर के प्रसिद्ध स्थानीय व्यंजन गरमा-गरम भजिया, अइरसा और सकनाल तैयार कर बेचती हैं। इस छोटे से व्यवसाय से उन्हें वर्तमान में लगभग 4 हजार रुपये प्रतिमाह शुद्ध आय हो रही है। उनकी यह पहल न केवल परिवार की आर्थिक स्थिति मजबूत कर रही है, बल्कि उन्हें गांव में एक नई पहचान भी दे रही है। अपनी आय से सुजाता पति का हाथ बंटाने के साथ ही अपने दोनों बच्चों को निजी विद्यालय में पढ़ा रही हैं और भविष्य के लिए बचत भी कर रही हैं। कभी परिवार की जरूरतों के लिए दूसरों पर निर्भर रहने वाली सुजाता आज अपनी मेहनत से परिवार की आर्थिक मजबूती में सहभागी बन गई हैं।

“यह पैसा नहीं, मेरे बच्चों की शिक्षा और आत्मसम्मान की पूंजी है”

सुजाता भावुक होकर कहती हैं, महतारी वंदन की राशि मेरे परिवार के लिए आर्थिक संबल बनकर आई है। इस योजना ने मेरे जीवन को नई दिशा दी है। अगर हर महीने एक हजार रुपये की सहायता नहीं मिलती, तो शायद मैं कभी अपनी दुकान शुरू नहीं कर पाती। यह मेरे लिए केवल पैसा नहीं, बल्कि मेरे बच्चों की शिक्षा और मेरे आत्मसम्मान की पूंजी है। इसके लिए मैं मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय जी को दिल से धन्यवाद देती हूं। सुजाता की कहानी यह संदेश देती है कि यदि अवसर और सहयोग मिले तो महिलाएं अपनी मेहनत, सूझबूझ और आत्मविश्वास से आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकती हैं। महतारी वंदन योजना से मिली छोटी-सी आर्थिक सहायता को उन्होंने बचत और व्यवसाय की पूंजी में बदलकर यह साबित किया है कि बहनों की तरक्की ही परिवार की शान है और आत्मनिर्भर नारी ही सशक्त समाज की पहचान है।

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